Thursday, December 6, 2018

CBI मामले में SC ने कहा- डायरेक्टर को 2 साल तक पद पर बने रहने का अधिकार

देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई में मचे घमासान पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को भी सुनवाई जारी है. बहस की शुरूआत करते हुए सॉलिसिटर जनरल (SG)  ने कहा कि निदेशक होने के बाद भी व्यक्ति अखिल भारतीय सेवा का हिस्सा होता है. चीफ जस्टिस रंजग गोगोई ने पूछा कि सीबीआई निदेशक के अधिकार वापस लेने पहले सेलेक्शन कमेटी की सलाह लेने में क्या मुश्किल थी? सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

बहस के दौरान जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि नियम के अनुसार सीबीआई डायरेक्टर को दो साल तक के लिए पद पर बने रहना चाहिए. जस्टिस जोसेफ ने सीनियर वकील दुष्यंत दवे से कहा कि वह सीवीसी एक्ट के बारे में पढ़ें, जिसमें कमिश्नर के हटाने की बात है लेकिन कभी सीबीआई डायरेक्टर को हटाने की बात नहीं है. दरअसल, दवे दलील दे रहे हैं कि सीवीसी को सीबीआई की जांच करने का अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार ने सीबीआई की स्वायत्ता का ध्यान नहीं रखा है.

जब कोर्ट रूम में लगे ठहाके

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की तरफ से कपिल सिब्बल ने कहा कि सीबीआई सिर्फ भ्रष्टाचार ही नहीं बल्कि आरुषि, हत्या जैसे कई मामलों का निपटारा करता है. इसी दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने उन्हें बीच में रोकते हुए कहा कि और वो मामले भी जो सीबीआई को हम देते हैं. इस दौरान कोर्ट में जोरों के ठहाके लगे.

गुरुवार को बहस की शुरूआत करते हुए SG तुषार मेहता ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाएं के सदस्यों के मामले का निपटारा सीवीसी एक्ट, 2003 की धारा 8(2) के तहत होता है.

सवाल यह है कि सीबीआई का निदेशक बनने के बाद क्या कोई व्यक्ति अखिल भारतीय सेवाएं का सदस्य रहता है? पुलिस एक्ट में ऐसा कही नहीं लिखा कि जिस व्यक्ति की योग्यता निदेशक बनने की है उसे पुलिस सेवा पर लागू होने वाले नियमों से छूट है.

जिसके जवाब में सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि आलोक वर्मा की दलील यह है कि उनके अधिकार वापस लेने संबंधी कोई भी कार्रवाई वीनीत नारायण जजमेंट के विपरीत है और ऐसा करने के लिए सेलेक्शन कमेटी की स्वीकृति की आवश्यकता है. सीजेआई ने तुषार मेहता से कहा कि सीबीआई निदेशक के अधिकार वापस लेने पहले सेलेक्शन कमेटी की सलाह लेने में क्या मुश्किल थी? जिसके जवाब में SG ने कहा कि यह ट्रांसफर का मामला नहीं था. तब सीजेआई ने कहा कि फिर भी सेलेक्शन कमेटी की सलाह लेने में क्या कठिनाई थी?

SG तुषार मेहता ने कहा कि निदेशक अखिल भारतीय सेवा का सदस्य होता है. जिसपर सीजेआई ने कहा बेशक. तुषार मेहता ने कहा कि मान लीजिए कोई अधिकारी घूस लेता हुआ कैमरे पर पकड़ा जाता है और उसे फौरन निलंबित करना है, तब ऐसी स्थिति में इसका अधिकार केंद्र सरकार के पास है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दोनों अधिकारी गंभीर मामलों की जांच करने के बजाय एक दूसरे की जांच कर रहे थें. सीवीसी संसद के प्रति जवाबदेह हैं. जिस पर सीजेआई गोगोई ने पूछा कि क्या सीबीआई के मामले में सीवीसी की जांच भष्टाचार विरोधी कानून से आगे जा सकती है. तब तुषार मेहता ने कैबिनेट सेक्रेटरी की सीवीसी को जुलाई में भेजी गई शिकायत का जिक्र करते हुए कहा कि सीवीसी की कार्रवाई अचानक नहीं हुई यह मामला पहले से चल रहा था.