Wednesday, November 28, 2018

सेंटिनेल जनजाति से मिलने वाले टीएन पंडित

मानवाधिकार समूह सर्वाइवल इंटरनेशनल का कहना है कि भारतीय अधिकारियों को अमरीकी मिशनरी जॉन एलिन शाओ के शव को वापस लाने की कोशिशों पर रोक लगा देनी चाहिए.

समूह का कहना है कि ऐसी कोशिश सेंटिनेल जनजाति के लोगों और अधिकारियों दोंनों के लिए ख़तरनाक़ साबित हो सकता है.

हाल में अमरीकी मिशनरी जॉन एलिन शाओ की मौत के बाद अंडमान निकोबार के सेंटिनल द्वीप पर रहने वाला ये समुदाय काफ़ी चर्चा में आया था.

17 नवंबर को 27 साल के शाओ को नॉर्थ सेंटिनेल ले जाने वाले मछुआरे ने बताया था कि उन्होंने उस जनजाति के लोगों को शाओ के मृत शरीर को समुद्रतट तक लाकर दफ़नाते हुए देखा है.

ये मछुआरा बाद में अधिकारियों को उस जगह पर भी ले कर गया जहां उनका दावा था कि शव को दफनाया गया था.

इस घटना के बारे में 80 वर्षीय भारतीय मानवविज्ञानी टीएन पंडित का कहना है, "उस अमरीकी युवा व्यक्ति की मौत के लिए मुझे बहुत दुःख है. लेकिन उसने एक गलती की. ख़ुद को बचाने के लिए उसके पास मौक़ा था, लेकिन वो वहां बना रहा और अपना जीवन खो बैठा."

मानवविज्ञानी टीएन पंडित उन चंद लोगों में से हैं जो भारत के अंडमान द्वीप पर रह रहे सेंटिनेलिस जनजाति से मिले हैं.

1991 में सरकारी अभियान का हिस्सा रहे पंडित ने भी इस तरह की स्थिति का सामना किया है. बीबीसी से फ़ोन पर बात करते हुए पंडित ने उनके साथ यादगार मुठभेड़ को याद किया.

टीएन पंडित बताते हैं, "मैं उन्हें नारियल देकर अपनी टीम के साथ दूर हो रहा था और किनारे के पास जा रहे थे. एक सेंटिनेल लड़का ने अजीब सा चेहरा बनाया, अपन चाकू लिया और मेरी ओर इशारा किया कि वो मेरा सिर काट देगा. मैंने तुरंत नाव को बुलाया और वापसी कर ली."

डरावने चेहरे
1973 में अपनी पहली यात्रा को याद करते हुए टीएन पंडित ने बीबीसी को बताया, "हम बर्तन, मटके, नारियल, हथौड़े और चाकू जैसे लोहे के औजार गिफ्ट के रूप में अपने साथ लेकर गए थे. हम अपने साथ तीन ओंग जनजाति (अन्य स्थानीय जनजाति) के पुरुष भी लेकर गए थे ताकि सेंटिनेल के व्यवहार और उनकी बातों को समझने में हमें मदद मिले."

इस संबंध में 1999 में उन्होंने एक लेख भी लिखा था, जिसमें उन्होंने अपने साथ हुए इस वाक़ये को याद किया था. बीती बातों को याद करते हुए पंडित कहते हैं, "लेकिन सेंटिनेलिज़ गुस्से में अपने गंभीर चेहरों के साथ और लंबे धनुष और तीर के साथ सशस्त्र होकर हमारे सामने आये. वो अपनी ज़मीन को बचाने के लिए घुसपैठियों से लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार थे. कई बार वो हमारी तरफ़ पीठ कर बैठ जाते."

"बंधा हुआ जिंदा सूअर भी उपहार के रूप में अनुचित था. उन्होंने उसे भाले से मारा और रेत में दफना दिया."

उनके बार में बहुत ही कम जानकारी मौजूद है इसलिए सेंटिनेल के बारे में कई मिथक भी हैं.

उसी लेख को याद करते हुए वे कहते हैं, "द्वीपों और पोर्ट ब्लेयर (निकटतम बड़े बंदरगाह) में एक लोकप्रिय धारणा थी कि उत्तरी सेंटिनेल द्वीप पठान का अपराधी है, जो ब्रिटिश के जेल से फरार हुए थे."

No comments:

Post a Comment